विंसेंट से दूर जाने से पहले
उर्सुला को पूछ लेना था
उसके रंगों से, बेरंग हो जाने के लिए
उसकी तूलिका से, कुछ न रच पाने के लिए
और उसके कैनवस से भी, मटमैला हो जाने के लिए
पर जाते हुए कुछ पूछ लेना जरूरी नहीं
फिर भी तमाम तारे मिलकर अंधियारे को खूबसूरत करते रहे
विंसेंट की हर एक रचना उसको बुलावा देती रही
और
रंग आज भी रंग है
तूलिका आज भी सर्जन में है
कैनवास आज भी चटकीला है
इसलिए जाते हुए कुछ पूछ लेना
इतना भी जरूरी नही


Nice शिवं 👌❤️
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