प्रेम गुजारिश



रितिक रोशन अभिनीत गुजारिश फिल्म में एक दृश्य आता है जब ईथन मैसकेरेनस की इच्छा मृत्यु की कोर्ट अपील ठुकरा दी जाती है और तब जाकर फिल्म का शीर्षक "गुजारिश"असलियत में समझ आता है तभी ईथन के पास सोफिया का पति आता है। यह बात सोफिया को पता लगती है तो वह ईथन के पास भाग कर आती है और अपने पति को वहां से जाने के लिए कहती है। बहुत वाद-विवाद होने के बाद:

सोफिया- ईथन को हाथ मत लगाओ।


पति - अपने हस्बैंड से ज्यादा तुम यहां? 


सोफिया - कौन सा हस्बैंड? 


पति - Hey I am a artist.


सोफिया - हां तुम्हें सिर्फ अपनी पेंटिंग्स की परवाह है इंसान की तो परवाह ही नहीं है। 


पति - (अपने हाथ में लिए फूलों को बड़े जोर से सोफिया के चेहरे पर दे मारता है और ईथन के पुछने पर सोफिया की तरफ देखते हुए कहता है)- 


I only paint her face, nothing else.

I am a painter. I need freedom. I need love.

And she gives me none of it.
Do you see? That’s what it does.
I am your husband.




फिल्म निर्माता जहां पर इच्छा-मृत्यु जैसे गंभीर विषय को उजागर कर रहा है तो यह संवाद किस लिए? हां मैं कला जगत से संबंध रखता हूं। लेकिन यहां बुरा मानने वाली बात नहीं है कि संवाद में पेंटर को गलत ठहराया गया है । खैर पेंटर होना ईश्वर होना नहीं हैलेकिन यह संवाद बहुत गंभीर है और इसी गंभीरता को समझने का रास्ता "The seagull" - anton chekhov पुस्तक पर मानसी सिंह की समीक्षा से मिलता है जोकि इंस्टाग्राम से लिया गया है-


एक कलाकार जब किसी से प्यार करता है तो क्या होता है? कुछ लोग कहते हैं कि कलाकार ज्यादा

गहराई से प्यार करते हैं, ज्यादा जुनून के साथ प्यार करते हैं। क्या कलाकार उस तरह प्यार करने में

असमर्थ होते हैं जैसी उम्मीद आम लोग करते हैं? 


कला रचना के लिए एकांत, जुनून व दूरी और बिना शर्त प्रेम की मांग होती है। लेकिन प्रेम ठीक

इसके उलट मांग करता है उपस्थिति,समझौता और देखभाल।

कोई कलाकार प्यार करता है तो वह दो हिस्सों में बट जाता है या तो वह प्यार चुने,

जिससे उसका रचनात्मक संसार सुख जाता है, या फिर कला जिससे वह भावनात्मक

रूप से अकेला पड़ जाता है।


और प्रेम के अलावा हम कलाकार एक और चीज की कल्पना करते हैं वह है

"म्यूज-(प्रेरणा का स्रोत)" इस पुस्तक में नीना वह लड़की थी जो अभिनेत्री बनना चाहती है,

इस बात का प्रतीक बन जाती है कि म्यूज़ की कल्पना कितनी खतरनाक हो सकती है।


वह स्टेज पर एक खूबसूरत जिंदगी जीना चाहती है। लेकिन अंत में भावनात्मक रूप से टूट

जाती है। ऐसा नहीं है कि उसमें प्रतिभा नहीं थी, बल्कि इसलिए क्योंकि उसने अपना सब कुछ

अपना दिल, अपनी जवानी एक ऐसे आदमी को दे रखी है जो उसे एक सामग्री की तरह देखता

है नाकि एक साथी की तरह।


कितनी ही लड़कियां ऐसे पुरुषों से प्यार करती हैं जो कला में तो शानदार होते हैं

लेकिन भावनात्मक रूप से अनुपलब्ध होते हैं। 


ऐसे कलाकार जो अपने साथी को प्रेरणा मानते हैं और जब वह प्रेरणा खत्म

हो जाती है तो उन्हें छोड़ देते हैं।


तो क्या? कलाकार सच में प्यार कर सकते हैं?

आप कलाकार हैं तो यह जानते होंगे कि कला रचने की भूख कैसी होती है।

लेकिन प्रेम भी एक तरह की भूख जैसे है। कभी-कभी आप इन दोनों को

महसूस नहीं कर सकते ।


यह नाटक आपसे सवाल करता है कि जब आप अपनी कला को सब कुछ दे देते हैं तो आपके

पास किसी और को देने के लिए क्या बचता है?


क्या आपको लगता है कलाकार इसलिए प्यार करते हैं क्योंकि वह कुछ महसूस करते हैं?  

दर्द, झटका और चिंता ताकि वे उसे सहेज सके और अगर आपने कभी किसी कलाकार से प्यार किया है तो क्या आपको सच में प्यार किया गया या आपकी भावनाएं सिर्फ उनकी कला में अमर हो गई? लेकिन असल जिंदगी में भुला दी गई?" -मानसी सिंह 


इसी संदर्भ में एक रचनाकार ने कुछ बातें कही थी-

कलाकार किसी भी तरह का हो उनके लिए प्रेम बस एक कल्पना होती है, कोरी कल्पना।

आप उसकी कल्पना का एक रंग है, एक राग हो सकते हैं पर एक हकीकत नहीं।

कलाकार प्रेम रचते हैं करते नहीं।


यह सब बातें स्वीकार्य है कि कलाकार मनुष्य की जगह विचार से प्रेम करते हैं, किसी भाव से प्रेम

करते हैं। पर एक सवाल उठता है कि क्यों कलाकारों के लिए प्रेम एक अभिशाप है? ऐसा इसलिए

क्योंकि जब वह प्यार करता है तो फिर कला नहीं पाता है और जब कला करता है तो वह प्यार पाने

में असमर्थ हो जाता हैं।


विन्सेंट वॉन गॉग की पुस्तकों और उसके द्वारा लिखे गए अपने भाई थियो को पत्रों से साफ-साफ झलकता है

कि वह भी इसी तरह का कलाकार था जो सिर्फ अपनी कला को ही तवज्जो देता था और अंत समय

तक उसे कुछ भी प्राप्त नहीं हो सका और वह लिखता भी है-


"मुझे प्रेम हुआ लेकिन वह मेरे ब्रश में सिमट गया,

अब मैं हर पेंटिंग में उसे खोजता हूं जो मेरे जीवन में नहीं रहा।"

"I risked my life for my work, and my reason has half foundered in it."


इस संवाद से इस चीज को और बेहतर समझा जा सकता है कि कलाकार या ऐसी चाह रखने वाले

वास्तव में स्वार्थ कारण से प्रेम या संबंध रखते हैं। जहां वह अपनी भावनात्मक स्मृतियों को दृढ़ कर

सके और उन्हें किसी कला-रचना में रूपांतरित कर सके।


अज्ञात- क्या तुम्हें मेरी याद आती है?

अज्ञात - यही सवाल मैं तुमसे पूछूं तो? तब क्या जवाब रहेगा? 


अज्ञात- सवाल पहले मैंने किया है, तो जवाब भी तुम पहले दोगें ।

अज्ञात - ठीक है मेरे पास तुम्हारी इस बात का जवाब नहीं है कि मुझे तुम्हारी याद आती है या नहीं

आती। लेकिन मेरे लिए व्यक्ति मायने नहीं रखता। मेरे लिए सिर्फ और सिर्फ भाव मायने रखते हैं।


लेकिन अंत सवाल यही है कि क्या प्रेम-जगत में कलाकार अविश्वास के पात्र हैं?

क्या वह उन लोगों से भी गए गुजरे हैं जो प्रेम तो करते हैं लेकिन उसे उस अंजाम तक भी लेकर

जाते हैं जहां मानवता शर्मसार व पीड़ित हो जाती है।


शिवं


(यह गुजारिश मूवी और पुस्तक "The seagull" - anton chekhov से निकले प्रश्न

"कलाकार का प्रेम" पर आधारित महज एक अपरिपक्व समीक्षा है।)

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