पहली बार
मांग रहा हूं
सिर्फ तुम्हें
तुम्हारे ही शिव से
कितना जरूरी
हो तुम
मेरे खुदके
शिवं होने में
ठीक तुम्हारे जैसा
तप तो नहीं
पर भय भी नहीं
निर्जल तपने से
कुछ मुश्किल नहीं
तुम्हारी चाह परम में
और मेरी सिर्फ
तुम ओर सिर्फ तुम में
पर देखो
कितना दूर हो तुम
ना जगह से
ना मन से
है सिर्फ दुरी
आपसी समझ से
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