मुझ जैसों के लिए “सड़क किनारे के फूल”


सड़क
किनारे के फूल
कितना संघर्ष करते हैं

धुल, मिट्टी
सर्दी और गर्मी
इनका संघर्ष नहीं है

बल्कि राह चलते इन्हें
नजर अंदाज किया जाता है 

इतनी विपरित परिस्थितियों 
में भी ये खिलते हैं 

राह चलते 
मुसाफिरों के लिए नहीं 

खुद के लिए... 
मुझ जैसों के लिए...

ये सड़क 
किनारे के फूल
कितना संघर्ष करते हैं 



ये कुछ खास है.है..... By MARIA POPOVA

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